ड्रोन क्या होता है? | ड्रोन कैसे उड़ता है? | हिंदी में पूरी जानकारी | | What is Drone information in Hindi

हमारे देश की तुलना में बाकी देशों में ड्रोन का बहुत उपयोग किया जाता है। क्योंकि हमारे देश में ड्रोन का उपयोग बहुत कम उपयोग होता है। इसीलिए शायद बहुत से लोगों को DRONE KYA HOTA HAI?  इसके बारे में जानकारी नहीं होती है। इसका उपयोग ज्यादातर केवल फोटो ग्राफर एरियल व्यू सूट और ट्रैवल ब्लॉगर्स के द्वारा ही किया जाता है। यदि आप भी यह जानना चाहते हैं। कि ड्रोन होता है? तो आज हम अपने इस लेख में ड्रोन से संबंधित सभी जानकारी हिंदी में देंगे।

यह लेख हम इसीलिए ही लाए हैं। कि जिन लोगों को ड्रोन से संबंधित कोई भी जानकारी नहीं है। उन्हें ड्रोन से संबंधित सभी जानकारी का पता लग जाए। ड्रोन के द्वारा हमले किए जाते हैं और लोग अक्सर न्यूज़ में इसका नाम सुनते हैं। इसीलिए लोगों के मन में इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने की उत्सुकता उठती है। आज हम आपको बताएंगे कि ड्रोन क्या होता है? ड्रोन कितने प्रकार के होते हैं? ड्रोन कैसे कार्य करता है ? हमारे देश में ड्रोन को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन है। अधिक जानकारी के लिए हमारे इस लेख के साथ अंत तक जुड़े रहे।

ड्रोन क्या होता है? What is Drone?

ड्रोन को भी दो अलग UAV या RPAS नामों से भी जाना जाता है। UAV को “Unmanned aerial Vehicles” कहते है। तथा RPAS की फुल फॉर्म “Remotely Piloted Aerial Systems” होती है। यदि साधारण शब्दों में कहा जाए तो इसे मानव निर्मित मिनी हेलीकॉप्टर भी कह सकते हैं। ड्रोन को हवा में उड़ाने के लिए रिमोट का इस्तेमाल किया जाता है। इस रिमोट को एक सॉफ्टवेयर के जरिए नियंत्रित किया जाता है। ड्रोन का वजन 150 ग्राम से लेकर 250 ग्राम से भी अधिक होता है। इनके वजन के आधार पर ही इन्हें अलग-अलग प्रकार में बांटा गया है।

ड्रोन का निर्माण इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में हुए डेवलपमेंट के कारण ही संभव हो पाया है। Drone technology रोज हो रहे इन्वेंशन के कारण पहले की तुलना में अब और भी ज्यादा एडवांस हो गई है। ड्रोन में 4 रोटोर लगे होते हैं। जिसकी सहायता से यह आसमान में आसानी से उड़ता है। ड्रोन को आसमान की आंख कहा जाता है। ड्रोन में एचडी कैमरा, ऑनबोर्ड सेंसर, जीपीएस और भी विभिन्न प्रकार के उपकरण लगे होते हैं।

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ड्रोन का आविष्कार किसने किया है? Who Invented the Drone?

ड्रोन को मानव जीवन का सबसे कामयाब इन्वेंशन माना जाता है। ड्रोन के जरिए बहुत बड़े-बड़े काम बहुत ही आसानी से किए जा सकते हैं। ड्रोन का आविष्कार किसने किया इससे संबंधित बहुत से तर्क दिए गए हैं। परंतु 1849 की एक रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में एक मानव रहित बम फेंकने वाला उपकरण बनाया गया था। जो दिखने में एकदम गुब्बारे की तरह नजर आता है। इसी घटना के बाद लोगों को ड्रोन जैसे उपकरण बनाने की प्रेरणा मिली।

ड्रोन का आविष्कार 1915 में एक महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला के द्वारा एक ऑटोमेटिक लड़ाकू विमान के रूप में किया गया था। इसे एक जगह से कंट्रोल कर के दुश्मनों पर आसानी से हमला किया जा सकता था। यही ऑटोमेटिक लड़ाकू विमान आधुनिक ड्रोन का अविष्कार माना जाता है।

आधुनिक ड्रोन का जो पहला संस्करण है। उसका अविष्कार Abraham Karem ने किया था। यह फिक्स्ड और रोटरी विंग मानव रहित वाहनों के एक डिज़ाइनर हुआ करते थे। उन्हें यूएवी संस्थापक यानी कि ड्रोन के पिता के रूप में जाना जाता है।

ड्रोन कहां इस्तेमाल किए जाते हैं? Where are Drones Used?

ड्रोन के इस्तेमाल किये जाने की चर्चा सन 1982 में हुई थी। जिस वक्त लेबनान युद्ध चल रहा था। इसी वक्त मानव रहित विमान ने सर्वप्रथम मानव को अपनी शक्ति का प्रदर्शन दिखाया था। इसके बाद विभिन्न देशों की सेनाओं ने ड्रोन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। ड्रोन को विभिन्न प्रकार के क्षेत्र के लिए विभिन्न प्रकार की टेक्नोलॉजी के साथ बनाया जाता है। जैसे-जैसे मानव द्वारा इसकी टेक्नोलॉजी एडवांस होती गई। वैसे वैसे ही इसे इस्तेमाल करने के क्षेत्र में बढ़ोतरी होती गयी। यह हर देश के लिए एक जरूरत बन गया है। ड्रोन को इस्तेमाल करने से देश की सुरक्षा बढ़ती है।

देश की सेनाओं के द्वारा सीमा की निगरानी करने के लिए Surveillance Drone (UAV) का इस्तेमाल किया जाता है। यह 24 घंटे देश की सीमाओं की निगरानी करता है। कुछ अन्य ड्रोन का उपयोग दुश्मन देशों पर हमला करने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इनका उपयोग सिविलियन भूमिका में भी किया जाने लगा है। इसका इस्तेमाल करने से हर देश बहुत सुरक्षित महसूस करता है। ड्रोन का अविष्कार खास तौर पर देश को एक अच्छी सुरक्षा प्रदान करने के लिए ही किया गया है।

ड्रोन का इस्तेमाल क्यों किया जाता है? Why are Drones Used?

ड्रोन इस्तेमाल किया जाने का सबसे बड़ा कारण यह है। कि ड्रोन मानव रहित होने के कारण किसी भी परिस्थिति में पायलट की जान जाने का खतरा नहीं होता है। साथ ही इसे आसमान में उड़ाने के लिए किसी भी प्रकार के ईंधन को खर्च नहीं करना पड़ता है। जिससे तकनीकी समस्याएं बहुत कम हो जाती है। यही कारण है कि यह लगातार उड़ान भरकर बिना किसी परेशानी के आसानी से कार्य को पूर्ण कर सकते हैं। ड्रोन में लगे ड्रोन कैमरा का इस्तेमाल एरियल फोटो और वीडियो शूट करने के लिए किया जाता है।

इस कैमरे का इस्तेमाल दुर्गम क्षेत्र में फंसे लोगों को ढूंढ कर उन्हें बचाने के लिए भी किया जाता है। साथ ही उन लोगों पर नजर भी रखी जा सकती है। आजकल ड्रोन का उपयोग ई-कॉमर्स कंपनी द्वारा सामान को डिलीवर करने के लिए भी किया जाता है। साथ ही यह नेशनल हाईवे और रेलवे ट्रैक की मैपिंग करने का कार्य करता है। यह एग्रीकल्चर ड्रोन के रूप में भी बनाया जा चुका है। इसलिए कृषि कार्य को आसान बनाने के लिए एग्रीकल्चर ड्रोन का उपयोग किया जाता है। यह कृषि के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा अविष्कार है।

ड्रोन कैसे उड़ता है? How does the Drone Fly?

ड्रोन्स को हम जीपीएस सिस्टम और Joystick की सहायता से उड़ाते हैं। परंतु इतने आसान यूजर इंटरफेस के पीछे बहुत सारे मैकेनिकल यूजर का कार्य भी होता है। तब जाकर यह ड्रोन हवा में आसानी से उड़ता है। ड्रोन उड़ाने के लिए जीपीएस, सॉफ्टवेयर और रिमोट यानी जॉयस्टिक बहुत आवश्यक होता है। ड्रोन को स्टार्ट करने के लिए चारों तरफ लगे Propeller घुमाना होता है। यह Propeller रोटोर के साथ मोटर से जुड़े होते है। ड्रोन को ऊपर की तरफ उड़ाने में रोटोर बहुत मदद करते हैं। जैसे ही हम ड्रोन को उड़ाने के लिए रिमोट को स्विच करते हैं। रोटर एक डाउनवर्ड फ़ोर्स जनरेट करता है। जिससे ड्रोन ऊपर की ओर उड़ता है।

जैसे ही ड्रोन ऊपर की ओर उड़ता है ड्रोन का डाउनलोडवर्ड फ़ोर्स ग्रेविटेशनल वजन के बराबर हो जाता है। तब ड्रोन हवा में स्थिर होकर मूवमेंट शुरू कर देता है। जॉयस्टिक के जरिए आप ड्रोन के रोटर्स को कंट्रोल कर सकते हैं। पायलट और ड्रोन की कनेक्टिविटी के लिए जीपीएस कार्य करता है। जीपीएस को ड्रोन का सुरक्षा कवच भी माना जाता है। ड्रोन में कैमरे का इस्तेमाल पायलट को लोकेशन और व्यू भेजने के लिए किया जाता है। इसमें आपको रियल टाइम बैटरी ट्रैकिंग भी मिलती है। इस प्रकार पायलट ड्रोन को उड़ाने में सक्षम होते हैं।

ड्रोन कैसे काम करता है? How does a Drone Work?

ड्रोन कैसे कार्य करता है? इसे नीचे पॉइंट के माध्यम से बताया गया है।

  • ड्रोन को बनाने में composite material का इस्तेमाल किया गया है। ताकि पायलट का कंट्रोल ड्रोन पर बढ़ाया जा सके। इसी composite materials के कारण ड्रोन एक ऊंची उड़ान भरने में सक्षम होता है।
  • ड्रोन के अग्र हिस्से में सेंसर और नेविगेशनल सिस्टम लगे होते हैं। और बाकी के हिस्से में Highly Complex Composites उपकरण लगे होते हैं। जो वाइब्रेशन को observe और नॉइस को कम करने का कार्य करते हैं।
  • इसमें 4 रोटर्स लगे होते हैं। जो सभी indivisual मोटर के साथ कनेक्ट होते हैं। यह ड्रोन्स का बैलेंस बनाए रखने और उसे स्थिर बनाए रखने का कार्य करते है।
  • ड्रोन फिजिक्स के Newton’s third law of motion पर कार्य करता है। जैसे ही रोटर्स तेज गति से घूमते हैं। वेसे ही ड्रोन्स ऊपर की तरफ उड़ता है।
  • आप ड्रोन को रिमोट की सहायता से दाएं और बाएं तरफ मोड़ सकते हैं। ड्रोन को आगे बढ़ाने के लिए आपको आगे की तरफ के दो रोटर्स की स्पीड बढ़ानी होती है।
  • ड्रोन में लगे रोटर की स्पीड को कम करने के लिए Ground Controp System (GSC) का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें लगे जॉयस्टिक के जरिए रोटर्स की स्पीड कम की जा सकती हैं।
  • रिमोट के जरिए ड्रोन का मोटर जितना अधिक वोल्टेज प्राप्त करता है। वह उतनी तेजी से उड़ता है।  लगभग सभी ड्रोन्स में lithium ion batteries का इस्तेमाल होता है।

ड्रोन कितने तरह के होते हैं? How many type of Drones are there?

ड्रोन्स विभिन्न प्रकार के होते हैं। परंतु  मुख्यतः इन्हें दो प्रकार में बांटा गया है।

  • Rotary Drone
  • Fixed Wing Drone

Rotary Drones:- रोटरी ड्रोन में केवल एक सिंगल रोटोर उपस्थित होता है। जबकि पीछे में एक टेल रोटोर होता है। जो Rotary Drone को कंट्रोल और स्टेबिलिटी प्रदान करता है। Rotary Drone के अंदर भी अलग-अलग ड्रोन के प्रकार होते हैं।

Single Rotor Helicopters :- यह छोटे प्रकार का ड्रोन होता है। इसमें एक सिंगल रोटोर होता है। तथा Tail की तरफ एक छोटा रोटोर लगा होता है। जो इसको कंट्रोल करने का और stability प्रदान करने का कार्य करता है। यह multi rotors के मुकाबले बहुत अधिक सक्षम होता है। यह ड्रोन अधिक समय तक हवा में उड़ने में सक्षम है। परंतु इसमें बहुत ज्यादा complexity और Operational Risk देखने को मिलते हैं। यह थोड़ा महंगा होता है। क्योंकि इसमें रोटर्स का ब्लेड साइज अन्य रोटोर की तुलना में बड़ा होता है।

Multi Rotors Drones:-  आजकल के दौर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाया जाने वाला ड्रोन Multi Rotors Drones हैं। बहुत सारे प्रोफेशनल कामों के लिए मल्टीरोटोर ड्रोन्स का ही इस्तेमाल किया जाता है। मल्टी रोटोर ड्रोन सेगमेंट के अंदर कई प्रकार के ड्रोन उपलब्ध होते हैं। इनके रोटर्स के ब्लेड्स का साइज छोटा होता है। Rotors की संख्या के आधार पर Multi Rotors Drones को कई भागों में बांटा गया है। जो कि निम्न प्रकार है।

Tri Copter:- इनमें rotors की संख्या तीन होती है। साथ ही 3 कंट्रोलर्स होते हैं। Tri Copter में चार Gyros और एक Servo Motor भी होता है।

Quad Copter:-  Quad Copter में 4 रोटोर ब्लेड्स होते हैं। इसके अंदर Brushless Type DC Motors का इस्तेमाल किया गया है। इस ड्रोन में दो रोटोर क्लॉक वाइज घूमने का कार्य करते हैं। और बाकी के दो रोटोर एंटीक्लाकवाइज घूमते हैं। सारे Quad Copter Drone में लिथियम पॉलीमर बैटरी का इस्तेमाल किया गया है।

Hexa Copter (6 Rotor):- इसमे 6 रोटोर पाए जाते हैं। जिसमें से तीन रोटोर क्लॉक वाइज घूमते है। और बाकी के तीन रोटोर एंटीक्लाकवाइज घूमते हैं। Hexa Copter लैंडिंग में सबसे ज्यादा safe होता है।

Octa Copter (8 Rotor):- इसमें आप 8 rotor होते हैं। जोकि सबसे ऊंची उड़ान भरने में सक्षम होते हैं। इनकी स्टेबिलिटी सबसे बेहतर होती है। Multi Rotor में सबसे ज्यादा इस्तेमाल ऑक्टॉकोप्टर ड्रोन्स का किया जाता है। इस प्रकार के ड्रोन्स को कुछ डॉलर खर्च करके ही खरीदा जा सकता है। साथ ही ऑक्टॉकोप्टर ड्रोन को उड़ाने के लिए किसी भी प्रकार की ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं होती है।

Fixed Wings Drones:-

Fixed Wings Drones रोटरी ड्रोन्स की रचना और बनावट के आधार पर बिल्कुल अलग होते हैं। इस प्रकार के ड्रोन में एयरप्लेन के समान विंग्स का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही एक इंटरनल इंजन या Motor-Controller Propeller का भी इस्तेमाल किया जाता है। जो Forward Airspeed के जरिए लिफ्ट उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं। fixed wings drones काफी ज्यादा हैवी होते हैं।

यह ड्रोन लंबे समय तक हवा में निगरानी और दुश्मन देशों पे अटैक का कार्य कर सकते हैं। take off करने के लिए fixed wings Drones को Runway की जरूरत पड़ती है। इन Fixed Wings Drone  का उपयोग आर्मी तथा long-distance ऑपरेशन के लिए करा जाता है। यह बाकी ड्रोन की तुलना में थोड़े एक्सपेंसिव होते हैं। इन्हें उड़ाने के लिए भी किसी ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं होती है। यह ड्रोन केवल आर्मी में ही इस्तेमाल किए जाते हैं।

भारत में ड्रोन को लेकर क्या गाइडलाइंस और लॉ है?

भारत में स्थित नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा ड्रोन को रोटोर कि संख्या के आधार पर विभाजित करके गाइडलाइन और लॉ दिए गए हैं। भारत सरकार द्वारा कई इलाकों में ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगा रखा है।

 नैनो ड्रोन (Nano Drone):-  नैनो ड्रोन का वजन 250 ग्राम तक होता है। इसलिए आपको नैनो ड्रोन को उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता पड़ती है। इससे अधिक वजन के ड्रोन को उड़ाने के लिए भी लाइसेंस की आवश्यकता होती है।

माइक्रो ड्रोन (Micro Drone) :- यह ड्रोन 250 ग्राम से लेकर 2 किलो तक का होता है। इस प्रकार के माइक्रो ड्रोन को उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-1 से परमिशन लेनी होती है। साथ ही आपको अपना ड्रोन रजिस्टर भी कराना होता है। तथा ड्रोन ऑपरेटर को ड्रोन उड़ाते समय SOP को फॉलो करना अनिवार्य होता है।

स्मॉल ड्रोन (Small Drone) :- जिन ड्रोन का वजन 2 किलोग्राम से लेकर 25 किलोग्राम तक होता है। उन्हें स्माल जोन की कैटेगरी में समायोजित किया जाता है।

मीडियम ड्रोन (medium Drone) :- वह ड्रोन जिनका वजन 25 किलोग्राम से लेकर 150 किलोग्राम तक होता है। उन्हें मीडियम ड्रोन में शामिल किया जाता है।

लार्ज ड्रोन (Large Drone) :-  वह ड्रोन जिनका वजन 150 किलोग्राम या उससे ज्यादा होता है। उन्हें लार्ज ड्रोन

 की सूची में सम्मिलित किया जाता है।

स्मॉल मीडियम ओर लार्ज ड्रोन को उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट और लाइसेंस लेने की आवश्यकता होती है। यदि आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं। तो आपको इसके लिए भी डीजीसीए से परमिशन लेनी होगी। तभी आप अपने ड्रोन को उड़ाने में सक्षम हो सकते हैं। इस तरह के सभी ड्रोन को बिना परमिशन और लाइसेंस के उड़ाना गैर कानूनी होता है। बिना परमिट या लाईसेंस के बिना ड्रोन उड़ाने पर ड्रोन ऑपरेटर पर जुर्माना और सजा का भी प्रावधान है।

प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाने से संबंधित प्रावधान:-

प्रतिबंधित जगह ड्रोन उड़ाने संबंधित निम्न प्रावधान है।

  • ड्रोन को बिना लाइसेंस या परमिट के प्रतिबंधित जगह पर उड़ाने पर ₹25000 का जुर्माना है।
  • नो-ऑपरेशन जोन में ड्रोन की उड़ान भरने पर ₹50000 का जुर्माना लगता है।
  • यदि ड्रोन स्मॉल, मीडियम और लार्ज कैटेगरी के अंदर आता है और उसका थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं होता है। तो ड्रोन ऑपरेटर पर ₹10000 का जुर्माना लगता है।
  • ड्रोन को उड़ाने के लिए तीन एरिया को specify किया गया है। मुझे Red Zone, Yellow Zone और Green Zone के नाम से जानते हैं।
  • ड्रोन उड़ाने से पहले आपको ड्रोन
  •  रेगुलेशंस द्वारा स्पेसिफाई किए गए रेगुलेशन को सभी कैटेगरी के ड्रोन रखने वाले लोगों को फॉलो करना आवश्यक होगा।

Red Zone:- इस एरिया में कोई भी व्यक्ति ड्रोन नहीं उड़ा सकता है। क्योंकि उसे सरकार द्वारा रेड जोन में ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं दी जाती है। रेड जोन के अंतर्गत एयरपोर्ट, इंटरनेशनल बॉर्डर, मिलिट्री इंस्टॉलेशन और सरकार के कुछ प्रमुख ऑफिस शामिल होते हैं। पार्लियामेंट हाउस और राष्ट्रपति भवन के आसपास भी ड्रोन उड़ाने की सरकार द्वारा अनुमति नहीं दी गई है।

Yellow जोन:-  आप इस जोन में ड्रोन उड़ा सकते हैं। परंतु उससे पहले आपको अथॉरिटी से परमिशन लेनी होती है। तभी आप Yellow Zone में ड्रोन उड़ाने के लिए सक्षम होते हैं।

Green Zone:- ग्रीन जोन के अंदर आने वाले क्षेत्र में आप बिना किसी परमिशन के ड्रोन उड़ा सकते हैं।

ड्रोन उड़ाने का लाइसेंस कैसे मिलेगा?

Nano और Micro Drone के अलावा आप किसी भी ड्रोन को बिना लाइसेंस या परमिट के उड़ाने में सक्षम होते हैं। Drones उड़ाने के लिए केवल 2 तरीके के लाइसेंस दिए जाते हैं।

  •  स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस
  • रिमोट पायलट लाइसेंस

ड्रोन उड़ाने का लाइसेंस लेने के लिए कुछ क्राइटेरिया है?

ड्रोन लाइसेंस लेने के लिए कुछ क्राइटेरिया निम्न प्रकार है-

  • इन दोनों लाइसेंस को पाने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 65 वर्ष तक होनी अनिवार्य है।
  • जो भी ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस प्राप्त करना चाहता है। वह कम से कम 10th क्लास तक पढ़ा होना चाहिए।
  • ड्रोन ऑपरेटर को लाइसेंस तभी प्राप्त होता है। जब वह डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन को पास कर लेता है।
  • स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस या फिर रिमोट पायलट लाइसेंस देने से पहले आपका बैकग्राउंड भी चेक होता है।

ड्रोन क्या होता है? इससे संबंधित प्रश्न व उत्तर (FAQs)

ड्रोन के अन्य नाम क्या होते हैं?

ड्रोन को UAV और RPAS अन्य नामों से भी जाना जाता है।

Q:- UAV और RPAS की फुल फॉर्म क्या होती है?

UAV की फुल फॉर्म “Unmened Aerial Vehicales” तथा RPAS की फुल फॉर्म “remotely piolated Aerial Systems” होती है।

Q:- ड्रोन का क्या कार्य होता है?

Ans:- ड्रोन देश की सीमा पर देश की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। यह ज्यादातर आर्मी के क्षेत्र में इस्तेमाल होते हैं।

Q:-  किस प्रकार के ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है?

Ans:- नैनो ड्रोन और माइक्रो ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है।

Q:- कौन से जोन में ड्रोन उड़ाना प्रतिबंधित होता है?

Ans:- Red Zone में ड्रोन को उड़ाना पूर्णतया प्रतिबंधित होता है। यदि आप रेड जोन में ड्रोन उड़ाते हैं। तो ड्रोन ऑपरेटर पर जुर्माना लगता है।

Q:- कौन से जोन में ड्रोन उड़ा सकते हैं?

Ans:- Yellow और Green Zone अमेजॉन उड़ा सकते हैं। परंतु यलो जोन में ड्रोन उड़ाने के लिए आपको परमिशन की आवश्यकता होती है। जबकि ग्रीन जोन में आप बिना किसी परमिशन के किसी भी क्षेत्र में ड्रोन उड़ा सकते हैं।

Q:- ड्रोन उड़ाने के लिए कौन से लाइसेंस की आवश्यकता होती है?

Ans:- ड्रोन उड़ाने के लिए दो प्रकार के लाइसेंस – स्टूडेंट पायलट लाइसेंस,  रिमोट पायलट लाइसेंस की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष

Conclusion:- आज हमने आपको अपने इस आर्टिकल में ड्रोन क्या होता है? इससे संबंधित संपूर्ण जानकारी प्रदान की है। यदि आप ड्रोन क्या होता है? इससे जानने में दिलचस्पी रखते हैं। तो आपको हमारी इस आर्टिकल में ड्रोन कैसे उड़ाया जाता है? ड्रोन कितने प्रकार के होते हैं?  ड्रोन उड़ाने का लाइसेंस कैसे प्राप्त करें? इससे संबंधित सारी जानकारी प्राप्त हो गई होंगी। यदि आपको हमारी द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई हो तो हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर बताइए। साथ ही हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले।

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