आईपीसी सेक्शन 452 क्या होता है?

भारत के सभी कायदे कानून संविधान के माध्यम से चलाए जाते हैं अर्थात कह सकते हैं कि भारत एक संवैधानिक देश है। हमारे देश में आए दिन कोई ना कोई घटना होती रहती है। संविधान के अनुसार इन सभी घटनाओं के लिए कोई ना कोई धारा अपराधी के ऊपर लगी लगाई जाती है। परंतु सभी व्यक्तियों को इन सभी धाराओं के बारे में जानकारी नहीं होती है। जबकि आपको अपने संविधान में उपस्थित सभी धाराओं की जानकारी होना आवश्यक है। इसलिए हमारे द्वारा इस लेख में आज आपको आईपीसी सेक्शन 452 क्या होता है? इसके बारे में संपूर्ण जानकारी विस्तार पूर्वक बताई गई है।

यदि कोई व्यक्ति किसी जुर्म के लिए दूसरे व्यक्ति पर कोई इल्जाम लगाता है। तो उसे धाराओं के बारे में जानकारी होनी चाहिए। साथ ही साथ उसे यह भी पता होना चाहिए कि अपराधी के लिए कौन से दंड का प्रावधान इस धारा के अंतर्गत होता है। यदि आप यह जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप किसी भी संबंधित वकील से इसके बारे में बात कर सकते हैं। इसलिए हमारे द्वारा आपको इस लेख में आज Bhartiya dand sanhita ki dhara 452 kya hai? इसके बारे में जानकारी दी गई है। साथ ही साथ यह भी बताया गया है कि इसके अंदर अपराधी के लिए सजा का क्या प्रावधान है? यदि आप संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। तो हमारे इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

आईपीसी धारा 452 क्या होता है? (What is the IPS section 452?)

आईपीसी धारा 452 के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने से पहले आपको यह पता होना आवश्यक है कि IPC DHARA 452 KYA HOTA HAI? आईपीसी धारा 452 के तहत यदि कोई व्यक्ति बिना किसी भी अनुमति के किसी व्यक्ति के घर में घुसने, उस पर हमला करने, उसे चोट पहचाने तथा किसी भी व्यक्ति पर दबाव बनाने का प्रयास करता है। तो उस व्यक्ति के लिए भारतीय दंड संहिता 452 के तहत दंड के प्रावधान है। इसी के तहत अपराधी के ऊपर किसी एक अवधि के लिए कारावास का प्रावधान होता है। तथा इस सजा को 7 वर्षों के लिए बढ़ाया भी जा सकता है।

आईपीसी सेक्शन 452 क्या होता है?

भारतीय दंड संहिता 452 एक ऐसे अपराध को संबोधित करती है। जिसके अंतर्गत एक से अधिक अपराध शामिल होते हैं। इस धारा 452 के अंतर्गत धारा 441 और धारा 442 के भी अपराध सम्मिलित होते हैं। हमला करना, दबाव बनाना तथा किसी कार्य के लिए किसी व्यक्ति को चोट पहचाना आदि इसी के अंतर्गत आते हैं। हम कह सकते हैं यदि आपके घर में कोई व्यक्ति आपकी बिना अनुमति के घुसता है और आपको किसी भी प्रकार की धमकी या फिर किसी कार्य हेतु दबाव बनाता है। तो आप आईपीसी धारा 452 के तहत उसे दंड दिला सकते हैं।

सजा का प्रावधान और अपराध की श्रेणी? (Provision of punishment and category of offence?)

हमारे द्वारा आपको ऊपर बताया है कि आईपीसी की धारा 452 के तहत अपराधी को सजा का प्रावधान है। इसीलिए आपको यह जानकारी प्राप्त होना आवश्यक है कि What is the provision of punishment and category of offence? इसके बारे में हमारे द्वारा नीचे जानकारी दी गई है। यह जानकारी निम्न प्रकार है-

  • यह सजा किसी भी अपराधी को तब दी जाती है। जब वह किसी अन्य व्यक्ति के घर में बिना उसकी अनुमति के घुसने, उस पर हमला करने या फिर किसी कार्य हेतु उस व्यक्ति पर दबाव बनाने का कार्य करता है। यदि अपराधी यह सभी कार्य करता है तो उसे-
  • ऐसे अपराधी के लिए कारावास की सजा को निर्धारित किया गया है। साथ ही साथिया सजा 7 वर्ष तक के लिए बढ़ाई जा सकती है।
  • अपराधी के आर्थिक दंड का भी प्रावधान है।
  • यह अपराध एक गैर जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। यह किसी भी न्यायाधीश के द्वारा विचारणीय हो सकता है। इस अपराध में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होता है अर्थात हम कह सकते हैं। यह प्राप्त समझौता रहित होता है क्योंकि समझौता करने के बाद भी इस में झगड़े की स्थिति और अपराधी का साहस बढ़ जाता है।

आईपीसी धारा 452 के मामले में वकील की जरूरत? (Lawyer needed in IPC section 452 case?)

भारतीय संविधान के अंतर्गत आईपीसी धारा 452 के अंतर्गत उल्लेखित अपराध को बहुत ही संगीन माना गया है। जिसके तहत कारावास की सजा का प्रावधान है। जिसे 7 वर्षों तक आगे बढ़ाया जा सकता है। साथ ही साथ जो अपराधी बिना किसी अनुमति के किसी के घर में घुसता है, किसी को हानि पहुंचाता है, हमला करता है या फिर किसी कार्य हेतु दबाव बनाता है। तो उसे आर्थिक दंड का भी भुगतान करना होता है। जिस का प्रावधान भी आईपीसी धारा 452 के अंतर्गत किया गया है। इस अपराध को करने के बाद अपराधी का सजा से बचना बहुत ही मुश्किल होता है। इसी के कारण निर्दोष अपराधियों को भी कभी-कभी सजा मिल जाती है।

यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को आईपीसी धारा 452 के तहत फंसाया जा रहा हो तो उसको निकलने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। परंतु ऐसे व्यक्ति को केवल वकील की सहायता प्रदान की जाती है। जो ऐसे व्यक्ति को बचाने में लाभकारी सिद्ध हो सकता है। यदि आपने अपना केस एक अच्छे वकील को दिया है। तो अवश्य ही आप इस सजा से बच पाएंगे। परंतु जो व्यक्ति इस अपराध को करता है। वह व्यक्ति इस अपराध से नहीं बच पाता है क्योंकि उसके पास किसी भी प्रकार का कोई सबूत नहीं होता है। साथ ही साथ हमारे संविधान में अपराधियों को सजा और निर्दोषों को न्याय दिलाने की बात कही गई है।

आईपीसी सेक्शन 452 क्या होता है? इससे संबंधित प्रश्न व उत्तर (FAQs)

Q:-1. आईपीसी सेक्शन 452 क्या होता है?

Ans:-1. आईपीसी सेक्शन 452 के तहत अपराधियों को सजा दी जाती है। इसकी जानकारी हमारे द्वारा आपको ऊपर इस लेख में भी दी गई है।

Q:-2. आईपीसी सेक्शन 452 के अंतर्गत कौन से अपराध आते हैं?

Ans:-2. यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के घर में बिना अनुमति के प्रवेश करता है। साथ ही उन पर हमला करता है, चोट पहुंचाता है, हानि पहुंचाता है या फिर किसी कार्य हेतु दबाव उत्पन्न करता है। तो उसे आईपीसी सेक्शन 452 के तहत सजा का प्रावधान है।

Q:-3. आईपीसी की फुल फॉर्म क्या होती है?

Ans:-3. IPC की फुल फॉर्म “indian penal code” होती है। जिसे हिंदी में “भारतीय दंड संहिता” के नाम से जाना जाता है।

Q:-4. आईपीसी सेक्शन 452 के तहत अपराधी को क्या सजा होती है?

Ans:-4. आईपीसी सेक्शन 452 के तहत अपराधी को कारावास की सजा सुनाई जाती है। इस सजा को 7 वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। साथ ही साथ अपराधी को आर्थिक धन का भुगतान करना होता है।

Qयदि निर्दोष के ऊपर आईपीसी सेक्शन 452 लगाई जाए तो वह किस प्रकार बच सकता है?

यदि किसी निर्दोष को फसाने हेतु किसी व्यक्ति के द्वारा उस पर आईपीसी सेक्शन 452 लगाई जाती है। तो वह अपने केस हेतु एक अच्छा वकील हायर कर सकता है। जिससे वह आसानी से बचाएगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

आज हमारे द्वारा आपको इस लेख में IPC Section 452 Kya Hota Hai? इसके बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया है। ऊपर बताई गई जानकारी से आपको आईपीसी धारा 452 के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा। जो कि अवश्य आपके काम आएगा। यदि आपको भारतीय दंड संहिता की धारा 452 के तहत और भी जानकारी प्राप्त करनी है। तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर बता सकते हैं। आपके कमेंट का जल्द से जल्द उत्तर दिया जाएगा। हमें उम्मीद है कि आपको हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी बेहद पसंद आई होगी। यदि आपको हमारे द्वारा जारी किया गया यह लेख पसंद आया हो तो इस लेख को अपने जरूरतमंद दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ शेयर करना ना भूले।

अपना सवाल यहाँ पूछें। कमेंट में अपना मोबाइल नंबर, आधार नंबर और अकाउंट नंबर जैसी पर्सनल जानकारी न शेयर करें।