[ऑनलाइन आवेदन] उत्तराखंड घस्यारी कल्याण योजना | आवेदन फॉर्म | लाभ, पात्रता, उद्देश्य

Uttarakhand Gudriya plan Apply form  :- उत्तराखंड भारत का एक पहाड़ी राज्य है और आप सभी जानते है की पहाड़ी जीवन बहुत संघर्ष पूर्ण होता है। इसलिए उत्तराखंड की सरकार समय – समय पर बहुत सी योजनाओं को प्रारम्भ करती है जिससे वहां निवास करने वाले लोगों का जीवन सुविधापूर्ण हो सकें और क्रम को और भी मजबूत बनाते हुए।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा उत्तराखंड घस्यारी कल्याण योजना 2021 की शुरुआत है। जिसके तहत विशेष रूप से उत्तराखंड के जंगलों जाकर पशुओं के लिए चारा एकत्रित करने वाले वाले महिलाओं को लाभान्वित किया जाएगा। इसलिए आर्टिकल में अंत तक हमारे साथ बने रहें। तो चलिए शुरू करते है –

उत्तराखण्ड घस्यारी योजना क्या है? | What is Uttarakhand Gudriya plan

उत्तराखंड घस्यारी कल्याण योजना आवेदन फॉर्म लाभ, पात्रता, उद्देश्य

21 फरवरी 2021 को उत्तराखंड मुक्त विश्विद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा UK Ghasyari Kalayan Yojana 2021 की शुरुआत करने का ऐलान किया। जिसके अंतर्गत प्रदेश में पशु चारा उत्पादन दर में वृद्धि की जाएगी और पशु चारे के बहुत कम ही दामों पर उपलब्ध कराया जायेगा।

क्योंकि महिलाओं को पशु चारा लेने जाने के लिए दूर जंगलों में जाना होता है और वहां जंगली जानवर भी उपस्थित होते है। जिस कारण उनकी जान जाने का भी जोखिम बना रहता है और 10 सालों में इन्हीं कारणों से 1000 नागरिकों की जांच जा भी चुकी है। लेकिन इस योजना के प्रारम्भ होने से ऐसी घटनाओं में कमी आयेगी। तो आइए इस योजना के बारे में विस्तार से जानते है।

उत्तराखंड घस्यारी योजना उद्देश्य | Uttarakhand Girlfriend Planning Objectives

उत्तराखंड घस्यारी योजना 2021 को शुरू करने के पीछे महिलाओं की सुरक्षा एक मुख्य उद्देश्य है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करने वाले परिवारों की महिलाओं को अपने पशुओं को चारा लेने, भोजन पकाने के लिए ईंधन एकत्रित करने के लिए जंगलों में जाना होता है। और पहाड़ी जंगलों में खतरनाक जानवर अधिक संख्या निवास करते है जिस कारण महिलाओं को जान जोखिम जाने का जोखिम बना रहता है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार द्वारा इस योजना की शुरुआत की गई है जिससे पशु चारे की उत्पादन दर में वृद्धि की जाएगी और जिससे प्रदेश के अधिक संख्या में पशु पालन से जुड़ सकेंगे और देश पशुओं से प्राप्त होने खाद्य पदार्थों और ईंधन की पूर्ति होगी।

पहले 10 साल में जा चुकी है 562 इंसानी जाने

यदि पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नज़र डाली जाए तो लगभग 562 लोगों को जंगली जानवरों के प्रहार के कारण जा चुकी है और जिसमें अधिकतर महिलाएं है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में पुरुषों के अपेक्षा महिलाओं को अधिक जंगलों में जाना होता है इसलिए महिलाओं को सुरक्षा उत्तराखंड में विशेष बिंदु बना हुआ है और इस पर ध्यान केंद्रित करते हुए। उत्तराखंड सरकार द्वारा इस योजना प्रस्ताव रखा है।

पशु चारा उत्पादन दर में की जायेगी

हम आपको ऊपर बता चुके है कि इस योजना का मुख्य बिंदु पशु चारे में वृद्धि करने है क्योंकि अब तक सहकारिकता विभाग द्वारा 8 हज़ार मीट्रिक टन चारे का उत्पादन किया जाता था। जिसे बढ़ाकर अब विभाग द्वारा 50 हज़ार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पशु चारे की औसतन कीमत में आएगी कमी

आज अगर प्रदेश में पशु चारे की औसतन कीमत देखी जाए। तो 15 रुपये प्रति किलो की है जिस कारण पशु पालकों को पशु पालन में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है लेकिन उत्तराखंड घस्यारी योजना 2021 के शुरू होने से प्रदेश में पशु चारा उत्पादन दर में वृद्धि होगी तथा पशु चारे की औसतन बिक्री दर में भी कमी आयेगी और ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि औसतन 15 रुपये किलो की चारा कीमत घटकर 03 रुपये तक हो जायेगी। जिससे पशु पालकों को काफी राहत मिलेगी।

25 लाख से अधिक परिवार पशुपालन से जुड़े है?

पहाड़ी क्षेत्रों में हमेशा से पशु के हरे और पौष्टिक चारे की रही है लेकिन फिर भी उत्तराखंड पहाड़ी राज्य होने के बाबजूद 25 लाख परिवार पशुपालन से जुड़े है और प्रदेश में पशुओं से प्राप्त होने वाले पदार्थों की पूर्ति कर रहे है लेकिन यहां के पशुपालकों को पशुपालन करने के लिए काफी संघर्षों का सामना करना पड़ता है।

इसलिए पशुपालकों के बोझ को कम करने के लिए इस योजना के प्रस्ताव को गया है जिसके उधमसिंह नगर के सितारगंज और खटीमा क्षेत्र में चारा उगाया जाएगा और आधुनिक मशीनों से काटयी करके पोली बैगों में पैक कर उसे जरूरतमंद पशु पालकों तक पहुंचाया जाएगा। जिससे पशु पालकों की संख्या में वृद्धि होगी और घस्यारी महिलाओं के सिर से चारे का बोझ हटेगा।

25 किलो पॉली बैगों को किया जायेगा तैयार

इस योजना के तहत चारे को उगाकर उसका प्रदेश के अलग – अलग क्षेत्रों में परिवहन किया जायेगा। जिससे जरूरतमंद लोगों तक चारे को पहुंचाया जा सकें। लेकिन परिवहन में किसी प्रकार की समस्या ना आये और सुविधापूर्ण ढंग से चारे के परिवहन हो सकें। इसलिए विभाग द्वारा 25 किलो पॉली बैगों के निर्माण करने की भी योजना तैयार की गयी है। जिससे चारा को पैक करके उसका आसानी से परिवहन की जा सकेगा।

UK Ghassyari Yojana 2021 Releted FAQ

हमारी हमेशा से ही कोशिश रहती है कि हम अपने पाठकों के सभी सवालों के जबाब प्रदान कर सकें। जिसके लिए हमारे द्वारा हर संभव प्रयास भी किया जाता है और इसी क्रम को अग्रसित करते हुये हमारे द्वारा उत्तराखंड मुख्यमंत्री घस्यारी योजना 2021 से संबंधित कुछ सवाल तथा उनके जबाबों को नीचे साझा किया है।

जो अक्सर लोगों द्वारा हम से कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछे जाते है। हम उम्मीद करते है कि आपकी बेहतर जानकारी में सहायक होंगे। जो कि निम्न प्रकार है –

क्या इस योजना के अंतर्गत केवल उत्तराखंड प्रदेश के पशु पालक ही लाभान्वित हो सकेंगे?

जी हां! इस योजना को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने प्रदेश के पशुपालक महिलाओं की सुविधा के लिए शुरू किया है या फिर सीधे शब्दों में कहें तो इस योजना के अंतर्गत केवल उत्तराखंड प्रदेश के पशु पालक ही लाभान्वित हो सकें।

उत्तराखंड के घस्यारी योजना के तहत किस प्रकार पशुपालक चारा की खरीदारी कर पाएंगे?

इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में 771 से अधिक सहकारी केंद्र बनाए जाएंगे जिनके माध्यम से पशुपालक चारे की खरीदारी कर पाएंगे।

उत्तराखंड सरकार द्वारा इस योजना को सफलतापूर्वक चलाये जाने के लिए कितने रुपए का बजट आवंटित किया गया है?

उत्तराखंड घस्यारी योजना को सफलतापूर्वक चलाए जाने के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा लगभग 100 करोड रुपए का बजट आमंत्रित किया गया है।

निष्कर्ष –

यदि आप उत्तराखंड प्रदेश में निवास करते हैं या फिर पशुपालक हैं तो आज आपको हमारे द्वारा लेख में बताई गई इंफॉर्मेशन आपको काफी पसंद आई होगी। अगर हां! तो ऐसे अन्य परिचित लोगों के  साथ भी शेयर करें।

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