एनआरसी की बात की जाए तो एनआरसी देश की सभी स्थानीय निवासियों की एक सूची होती है। स्थानीय स्तर के अनुसार गांव, कस्बे, राज्य और केंद्रीय स्तर पर डेटाबेस तैयार करना होता है

एनआरसी के माध्यम से केंद्र सरकार के द्वारा देश में अवैध रूप से निवास कर रहे प्रवासियों की पहचान की जाती है। सरकार के द्वारा किसी निजी क्षेत्र में जांच के दौरान क्षेत्र के लोगों से अपने वैध दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा जाता है।

इन सभी दस्तावेजों को इकट्ठा करके इनका परीक्षण किया जाता है। इसकी तत्पश्चात ही एनआरसी के माध्यम से वैध नागरिकों की सूची को जारी किया जाता है।

एनआरसी के माध्यम से अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान की जाती है और उनकी पहचान करके उन्हें देश से बाहर निकाला जाता है। साथ ही साथ इसके अंतर्गत नागरिकता का बहुत महत्व होता है।

एनपीआर में देश के प्रत्येक व्यक्ति को पंजीकरण जाना आवश्यक होता है। इसमें यदि कोई व्यक्ति किसी स्थान पर 6 महीने से अधिक रहता है। तो उसे पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है।

एनआरसी के तहत प्रत्येक व्यक्ति के पास दस्तावेज होने आवश्यक है क्योंकि एनआरसी में किसी व्यक्ति को निश्चित स्थान का नागरिक उसके वैध दस्तावेजों के आधार पर माना जाता है।

एनपीआर के अनुसार जो व्यक्ति किसी निश्चित स्थान पर 6 महीने से अधिक समय पर रह रहे हो और उन्होंने एनपीआर में रजिस्टर करा दिया हो। वह निवासी स्थानीय निवासी कहलाते है

देश के प्रत्येक नागरिक की जानकारी एक जगह इकट्ठा हो। इस कारण एनपीआर को लाया गया है। इसमें प्रत्येक नागरिक का परिचय और बायोमैट्रिक डाटा अंकित होता है।

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