जब से सीएए और एनआरसी की बात सामने आई है। पूरे देश में कुछ अजीब सी स्थिति बनी हुई है। एक तरफ मोदी सरकार और उसके समर्थक इसका खुले हाथों से स्वागत कर रहे हैं।

एनआरसी की बात करें, तो एनआरसी केवल भारत देश के असम राज्य में लागू की गई थी। जबकि नागरिकता संशोधन कानून देशभर में लागू हुआ। एनआरसी को केवल राज्य विशेष में लागू किया गया था।

इसे सरकार द्वारा पूरे भारत में लागू किया गया है। हालांकि बहुत से मुख्यमंत्रियों के द्वारा इस कानून का विरोध किया गया है और उन्होंने खुद के राज्यों में यह कानून लागू नहीं किया है।

सीएए की फुल फॉर्म Citizenship Amendment Act होती है। जिसे हिंदी में नागरिकता संविधान अधिनियम के नाम से जाना जाता है। देश में इसी का विरोध चल रहा है।

यह सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बनाया गया एक कानून है। जिसके अंतर्गत अफगानिस्तान, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश के धार्मिक उत्पीड़न नागरिकों को भारत सरकार द्वारा नागरिकता प्रदान करने की बात कही गई है।

सीएबी की फुल फॉर्म “Citizenship Amendment Bill” होती है। जिसे हिंदी में “नागरिकता संशोधन बिल” के नाम से जाना जाता है। इसी को सीएए कहां गया है।

नागरिकता संशोधन कानून पर देशभर में विरोध किया जा रहा है। विरोधियों का कहना है कि यह नागरिकता का प्रावधान केवल गैर मुस्लिम लोगों के लिए है। जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है।

वह नागरिकों दूसरे देशों से दस्तावेजों के साथ भारत में आते हैं तथा वह नागरिक जो वैध दस्तावेजों के साथ भारत में आकर निर्धारित तिथि पर वापस नहीं जाते हैं। उन्हें अवैध प्रवासी कहते हैं।

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